Dwarika: भगवान श्री कृष्ण की भूमि पर अवैध मस्जिद-मजारें… ढहाकर 1 लाख वर्ग फीट जमीन कब्जे से मुक्त

हिन्दू ग्रंथों के अनुसार, द्वारिका की स्थापना स्वयं भगवान कृष्ण ने करायी थी. जिस समय मथुरा पर जरासंध बार-बार आक्रमण करने लगा था, उन्होंने मथुरावासियों की रक्षा के लिए स्वयं मथुरा से हटना उचित समझा. द्वारिका से ही कुछ दूरी पर बेट द्वारिका नाम का द्वीप है. यहीं भगवान का महल हुआ करता था. इसी बेट द्वारिका में गैरकानूनी कब्जे करके लोगों ने मजारें, दरगाहें, गोदाम और रिहाइशी इमारतें खड़ी कर दी थीं. अब इन्हें ढाहा जा रहा है.

2022 के अक्टूबर की शुरुआत से ही गुजरात सरकार ने इन अतिक्रमणों को ढहाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया और लगभग एक लाख वर्ग फुट सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त करा लिया. इस दौरान 100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए. इनमें कई मस्जिद, मजारें और इमारतें शामिल थीं.

पिछले दिनों न्यूज़ 18 इंडिया पर एक कार्यक्रम के दौरान गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी से जब इन अवैध मजारों को लेकर प्रश्न किया गया तो उन्होंने साफ कहा, “वह सारी जमीन श्रीकृष्णा की है, वहाँ इस तरह की डुप्लिकेट मज़ार नहीं चलाएँगे.”

बेट द्वारिका कभी हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र हुआ करता था. देखते-देखते यहाँ हिन्दुओं का आबादी कम हो गई और मुस्लिम बहुसंख्यक हो गए. फिर शुरु हुई जमीन पर अवैध कब्जे की साज़िश. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक बेट द्वारिका में जंगल काटकर समुद्र के किनारे कई मस्जिद और मज़ारें बनाई गईं. उन स्थानों को चुना गया, जो खाली या वीरान थीं. सालों से निवास कर रहे लोगों को भी नहीं पता कि मस्जिद और मजारों को किसने बनाया.

भौगोलिक स्थितियों के कारण बेट द्वारिका में गिनती के लोग रहते थे. समुद्र से घिरे होने की वजह से यहाँ पीने के पानी की दिक्कत थी और रोजगार के साधन भी नहीं थे. धीरे-धीरे मछुआरों ने यहाँ रहना शुरू किया, लेकिन मुस्लिमों की बढ़ती आबादी की वजह से हिंदू बेट द्वारिका छोड़कर जाने लगे.

बदल चुकी है डेमोग्राफी

इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार बेट द्वारिका मंदिर के मुख्य पुजारी का दावा है कि हर साल 5-10 हिन्दू परिवार बेट द्वारिका छोड़कर चले जाते हैं. कुछ लोग अवैध कब्जे से परेशान हैं तो कुछ लोग यहाँ चल रही अवैध गतिविधियों से परेशान होकर चले जाते हैं.

भगवान कृष्ण की भूमि बेट द्वारिका की डेमोग्राफी पूरी बदल चुकी है. द्वीप पर मुस्लिमों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है. राज्य सरकार के अतिक्रमण हटाओ अभियान से बेट द्वारिका मंदिर के पुजारी बेहद खुश हैं. बेट द्वारिका न सिर्फ हिंदू तीर्थ स्थल होने के नाते बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बहुत संवेदनशील है.

राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा

बेट द्वारिका के ज्यादातर लोग मछली का कारोबार करते हैं. लोग बोट से इंटरनेशनल बॉर्डर तक जाते हैं. कितने लोग बॉर्डर की तरफ जा रहे हैं, लौट कर कितने लोग आते हैं, इसका हिसाब रखने वाला कोई नहीं है. यहाँ से कराची की दूरी सिर्फ 105 किलोमीटर के आसपास है.

रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ के लोगों ने पाकिस्तानियों से वैवाहिक संबंध भी स्थापित किए हुए हैं. द्वारिका के एक स्थानीय आरएसएस नेता ने दैनिक भास्कर को बताया कि द्वीप पर कुछ घर तो ऐसे बने हुए हैं, जिनमें बोट अंदर तक चली जाती है. इन घरों के बारे में अधिकारियों को भी पता है.

गुजरात हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को लगाई थी फटकार

ऑप इंडिया की खबर के अनुसार, बेट द्वारिका की डेमोग्राफी बदल रही. हिंदू अपने घर छोड़ कर जा रहे. ऊपर से रही सही कसर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पूरी कर दी. पिछले दिनों बेट द्वारिका द्वीप पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा कर दिया. मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुँचा. कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से पूछा कि श्री कृष्ण की नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं? और फटकार लगाते हुए याचिका खारिज कर दी थी.