सामाजिक समरसता दिवस पर “21 वी सदी में डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रासंगिकता पर हुई परिचर्चा

रांची.बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर के पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड इकाई द्वारा से सोमवार को “21 वीं सदी में डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रासंगिकता” विषय पर परिचर्चा (ऑनलाइन) का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में मारवाड़ी कॉलेज में इतिहास विभाग के सहायक प्रध्यापक डॉ कंजीव लोचन जी ने बाबा साहब के सर्वथा नवीन विचारों से हमें अवगत कराया.

बदलते परिवेश तथा परिस्थिति के साथ हम कुछ महान विभूतियों को या तो विस्मृत करते जा रहे हैं अथवा उन्हें एक हासिये पर ढकेल देते हैं. परंतु सम्पूर्ण मानवता ही नही जीवन जगत के प्रति बाबा साहब के विचार हमें उनकी प्रासंगिकता के प्रति सदैव सचेत रखते हैं.कार्यक्रम के आरम्भ में ही बाबा साहब के विचारों से अवगत कराने के क्रम में हमारे समाज, संस्कृति तथा एक मनुष्य होने के नाते मनुष्य के प्रति हमारी जबाबदेही के सम्बंध में बाबा साहब के विचार हमें सोचने पर विवश करते हैं. वर्तमान समाज की विद्रूपताएं हमे सोचने पर विवश करती हैं. कि यह बुद्ध की धरती युद्ध की धरती कैसे बनी, जिसमें एक धर्म के प्रति दूसरा धर्म असहिष्णु है, एक वर्ग के प्रति दूसरा वर्ग असहिष्णु है. समाज की मूलभूत सरंचना जिसमें समाजिक बंधन एवं संस्कृति भारतीयता के मूल में विद्यमान थी, उसका हरास हो रहा है.

बाबा साहब के विचारों में सामाजिक समरसता के सूत्र विद्यमान हैं. धार्मिक, आर्थिक, समाजिक एवं राजनीतिक सभी अस्त्रों पर नावजगरुक्ता की आवश्यकता है. यह बाबा साहब के विचार ही हैं जो हमें मनुष्यता की ओर लौटने हेतु प्रेरित करते हैं.

कार्यक्रम का आयोजन अमित कुमार सिंह तथा कार्यक्रम का अंत नीरज तिवारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

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