75th Independence Day: “जय जवान, जय किसान, जय अनुसंधान”, 83 मिनट के भाषण में पीएम मोदी ने देशवासियों को दिलाए 5 संकल्प

आज देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ है. लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 9वीं बार तिरंगा फहराया. इस दौरान 83 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने देश के सामने 5 संकल्प रखे. उन्होंने भ्रष्टाचार, परिवारवाद, भाषावाद और लोकतंत्र के बारे में कहा. इसके साथ ही उन्होंने गांधी, नेहरु और सावरकर को याद कर नमन किया.

प्रधानमंत्री ने अपने 83 मिनट के भाषण के दौरान नारी शक्ति के सम्मान की बात कही. उन्होंने कहा, मैं एक पीड़ा जाहिर करना चाहता हूं. मैं जानता हूं कि शायद ये लाल किले का विषय नहीं हो सकता. मेरे भीतर का दर्द कहां कहूं. वो है किसी न किसी कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आई है, हमारी बोल चाल, हमारे शब्दों में.. हम नारी का अपमान करते हैं. क्या हम नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं.

मोदी के पांच प्रण, जो उन्होंने देशवासियों को दिलाए

PM ने कहा कि अगर हम अपनी ही पीठ थपथपाते रहेंगे तो हमारे सपने कहीं दूर चले जाएंगे. इसलिए हमने कितना भी संघर्ष किया हो उसके बावजूद भी जब आज हम अमृत काल में प्रवेश कर रहे हैं, तो अगले 25 साल हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. आज मैं लाल किले से 130 करोड़ लोगों को आह्वान करता हूं. साथियों मुझे लगता है कि आने वाले 25 साल के लिए भी हमें उन पांच प्रण पर अपने संकल्पों को केंद्रित करना होगा. हमें पंच प्रण को लेकर, 2047 जब आजादी के 100 साल होंगे, आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरे करने का जिम्मा उठाकर चलना होगा.

पहला प्रण: अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चले. बहुत बड़े संकल्प लेकर चलना होगा. बड़ा संकल्प है, विकसित भारत.
दूसरा प्रण: किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर गुलामी का एक भी अंश अगर अभी भी है तो उसको किसी भी हालत में बचने नहीं देना है. हमें उससे मुक्ति पानी ही होगी.
तीसरा प्रण: हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए. यही विरासत जिसने कभी भारत का स्वर्णिम काल दिया था. इस विरासत के प्रति हमें गर्व होना चाहिए.
चौथा प्रण: एकता और एकजुटता. 130 करोड़ देशवासियों मे एकता. न कोई अपना न कोई पराया.
पांचवां प्रण: नागरिकों का कर्तव्य. जिसमें PM भी बाहर नहीं होता, CM भी बाहर नहीं होता है. वो भी नागरिक हैं. आने वाली 25 साल के सपनों को पूरा करने के लिए एक बहुत बड़ी प्राणशक्ति है. जब सपने बड़े होते हैं. जब संकल्प बड़े होते हैं तो पुरुषार्थ भी बहुत बड़ा होता है.

भ्रष्टाचार और परिवारवाद को करना होगा खत्म

पीएम ने कहा, ‘आज हम दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. भ्रष्टाचार और ‘परिवारवाद’ या भाई-भतीजावाद. हमें अपनी संस्थाओं की ताकत का एहसास करने के लिए, योग्यता के आधार पर देश को आगे ले जाने के लिए ‘परिवारवाद’ के खिलाफ जागरूकता बढ़ानी होगी. भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है, हमें इससे लड़ना है. उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश को लूटा, उन्हें लौटाना होगा. बैंक लूटनेवालों की संपत्ति जब्त हो रही है.

हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए

हमारी प्रतिभा भाषा के बंधनों में बंध जाती है. मोदी ने कहा कि हमने देखा है कि कभी कभी हमारी प्रतिभा भाषा के बंधनों में बंध जाती है. ये गुलामी की मानसिकता का परिणाम है. हमें हमारे देश की हर भाषा पर गर्व होना चाहिए.

जय जवान, जय किसान, जय अनुसंधान

PM ने आज लाल किले की प्राचीर से नया नारा दिया. उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें जय विज्ञान जोड़ा और अब इसमें जय अनुसंधान जोड़ने का समय आ गया है. अब जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान हो.

संयुक्त परिवार देश की बड़ी विरासत

मोदी ने कहा कि जब तनाव की बात होती है तो लोगों को योग दिखता है. सामूहिक तनाव की बात होती है तो भारत की पारिवारिक व्यवस्था दिखती है. संयुक्त परिवार की एक पूंजी सदियों से हमारी माताओं के त्याग बलिदान के कारण परिवार नाम की जो व्यवस्था विकसित हुई, ये हमारी विरासत है जिस पर हम गर्व करते हैं.

लोकतंत्र की जननी भारत

मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है. मदर ऑफ डेमोक्रेसी है. जिनके जेहन में लोकतंत्र होता है वे जब संकल्प करके चल पड़ते हैं. सामर्थ्य दुनिया की बड़ी बड़ी सल्तनतों के लिए भी संकट का काल लेकर आती है ये मदर ऑफ डेमोक्रेसी. हमारे भारत ने सिद्ध कर दिया कि हमारे पास ये अनमोल सामर्थ्य है. 75 साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हर एक के प्रयास से हम यहां तक पहुंच पाए. आजादी के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला.

जिसे सब भूले, हमने उन्हें याद किया

जब हम आजादी की चर्चा करते हैं, तो जंगलों में रहने वाले आदिवासी समाज का गौरव नहीं भूलते. बिसरा मुंडा समेत अनगिनत नाम हैं, जिन्होंने आजादी के आंदोलन की आवाज बनकर सुदूर जंगलों में आजादी के लिए मर मिटने की प्रेरणा जताई. एक दौर वो भी था, जब स्वामी विवेकानंद, स्वामी अरविंदो, रवींद्र नाथ टैगोर भारत की चेतना जगाते रहे. 2021 से शुरू हुए आजादी के अमृत महोत्सव में देशवासियों ने व्यापक कार्यक्रम किए. इतिहास में इतना बड़ा महोत्सव पहली बार हुआ. हमने उन महापुरुषों को भी याद किया, जिन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली या उन्हें भुला दिया गया.

सबने दर्द खुशी खुशी सहा

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ’14 अगस्त को भारत ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को भी हृदय के घावों को याद करके मनाया. देश वासियों ने भारत के प्रति प्रेम के कारण सबने दर्द खुशी खुशी सहा. आजादी के अमृत महोत्सव में हम सेना के जवानों, पुलिसकर्मी, ब्यूरोक्रेट, लोकसेवक, जनप्रतिनिधि, शासक-प्रशासकों को याद करने का अवसर है.’

डराया गया… फिर भी भारत आगे बढ़ता रहा 

75 साल की हमारी ये यात्रा अनेक उतार चढ़ाव से भरी हुई है. सुख दुख की छाया मंडराती रही है. इसके बीच भी हमारे देशवासियों ने पुरुषार्थ किया. उपलब्धियां हासिल कीं. ये भी सच्चाई है, सैकड़ों सालों की गुलामी ने गहरी चोटें पहुंचाई हैं. इसके भीतर एक जिद थी, जुनून था. आजादी मिल रही थी तो देशवासियों को डराया गया. देश के टूटने का डर दिखाया गया. लेकिन, ये हिंदुस्तान है. ये सदियों तक जीता रहा है. हमने अन्न का संकट झेला, युद्ध के शिकार हुए. आतंकवाद का प्रॉक्सीवार, प्राकृतिक आपदाएं झेलीं, लेकिन इसके बावजूद भारत आगे बढ़ता रहा.

बच्चे कह रहे हैं कि अब विदेशी खिलौने से नहीं खेलेंगे

PM ने कहा, ‘5 साल का बच्चा घर में विदेशी खिलौने से नहीं खेलने का संकल्प करता है, तब आत्मनिर्भर भारत उसकी रगों में दौड़ता है. आप देखिए, PLI स्कीम. एक लाख करोड़ रुपए, दुनिया के लोग भारत में नसीब आजमाने आ रहे हैं. भारत मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है. आज देश बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है. जब हमारा ब्रह्मोस दुनिया में जाता है तो कौन हिंदुस्तानी होगा, जिसका मन आसमां को नहीं छूता होगा. हमें आत्मनिर्भर बनना है. हमें ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनना है. सोलर, विंड एनर्जी का क्षेत्र हो, मिशन हाइड्रोजन, बायो फ्यूल, इलेक्ट्रिक व्हीकल पर जाने की बात हो हमें आत्मनिर्भर बनना होगा.’

सेना के जवानों, सेनानायकों को सलाम 

आजादी के 75 साल बाद जिस आवाज को सुनने को लिए हमारे कान तरस रहे थे. 75 साल के बाद लाल किले से तिरंगे को सलामी देने का काम मेड इन इंडिया तोप ने किया है. कौन हिंदुस्तानी होगा जिसको ये आवाज नई प्रेरणा और ताकत नहीं देगी. मेरे देश की सेना के जवानों का अभिनंदन करना चाहूंगा. मेरी सेना के जवानों ने, सेनानायकों ने जिस जिम्मेवारी के साथ कंधे पर उठाया है, उनको आज मैं सलाम करता हूं. सेना का जवान मौत को मुट्ठी में लेकर चलता है.