एड्स दिवस: HIV पॉजिटिव मां को अपने बच्चों को स्तनपान (Breastfeeding) कराना चाहिए या नहीं !

आज एड्स दिवस है. एड्स एचआईवी नाम के वायरस से फैलता है. एचआईवी एक ऐसा खतरनाक वायरस है. जो किसी को मौत के दरवाजे तक पहुंचा सकता है. यह वायरस संक्रमित खून, असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाते समय या संक्रमित इंजेक्शन से स्वस्थ व्यक्ति में फैलता है. वहीँ, एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे में भी यह इन्फेक्शन ट्रांसमिशन हो सकता है. एचआईवी संक्रमित महिलाएं अक्सर कंफ्यूज रहती हैं कि वह अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं या नहीं. आज हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ जानकारियां –

एक्सपर्ट के अनुसार, एचआईवी पॉजिटिव महिलाएं एआरटी और मातृ वायरल लोड की परवाह किए बिना शिशुओं को स्तनपान कराने से बचें. डब्लूएचओ के अनुसार, स्तनपान (Breast Feading) के माध्यम से वायरस फैलने के रिस्क को कम करने के लिए पॉजिटिव माताओं को एआरटी दिया जाना चाहिए.

दूध सहित तरल पदार्थों से फैलता है यह वायरस

एचआईवी एक वायरस है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है. यह वायरस स्तन के दूध सहित शरीर के कुछ तरल पदार्थों से फैलता है. ऐसे में पॉजिटिव मां से गर्भावस्था, जन्म अथवा स्तनपान (Breast Feeding) के दौरान HIV वायरस पहुंच सकता है.

एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (HAATT) है ज़रूरी

हालांकि कई बार डॉक्टर स्थिति के अनुसार, मां को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी या आरटी देते हैं. इससे मां से शिशु में एचआईवी संचरण का रिस्क कम होता है. एक्स स्टडी के अनुसार, हाइली एक्टिव एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (HAATT) से प्रेगनेंसी में HIV ट्रांसमिशन का खतरा कम हो सकता है. रिसर्च में पाया गया है कि इससे मां से बच्चे में वायरस ट्रांसमिशन रेट 1.2% तक कम हो सकते हैं.

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