The Kashmir Files: कौन हैं फारूक अहमद डार उर्फ ‘बिट्टा कराटे’? क्यों कहा जाता है उसे ‘कश्मीरी पंडितों का कसाई’?

सिनेमाघरों में ‘द कश्मीर फाइल्स’ के रिलीज होने के बाद से ही अभिनेता चिनमी मांडलेकर का रोल इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. मांडलेकर ने ‘बिट्टा कराटे’ के नाम से मशहूर ‘फारूक अहमद डार’ की भूमिका निभाई है. जो आजकल चर्चाओं में है.

कश्मीरी पंडितों के हत्यारों में सबसे ऊपर है फारुक

बता दें कि विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म “द कश्मीर फाइल्स” कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर आधारित है. 1990 में आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों की हत्या को पाकिस्तान या उसके समर्थित संगठनों ने बढ़ावा दिया था. इसके चलते हजारों लोग कश्मीर घाटी छोड़कर चले गए. गौरतलब है कि फारूक अहमद डार का नाम कश्मीरी पंडितों के हत्यारों में सबसे ऊपर आता है. बताया जाता है कि फारूक अहमद डार या बिट्टा कराटे अपराधी बनने से पहले एक आम आदमी हुआ करता था.

बिट्टा द्वारा 20 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हुई थी हत्या

कराटे ने दावा किया था कि स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें परेशान करने के बाद उसने आतंकवाद का रास्ता चुना. उसने कहा कि वह कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (केएलएफ) के एरिया कमांडर इशफाक मजीद की मदद से पाकिस्तान गया और बदला लेने के लिए वहां 32 दिन का प्रशिक्षण लिया. 1991 में एक प्रमुख समाचार चैनल के साथ एक साक्षात्कार में उसने 20 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हत्या करना स्वीकार किया. जून 1990 में गिरफ्तार होने से पहले वह जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का टॉप हिटमैन भी बना था. उसे “कश्मीरी पंडितों का कसाई” भी कहा जाता था.

वर्तमान में कहां है फारूक अहमद डार उर्फ ‘बिट्टा कराटे’?

विशेष रूप से बिट्टा कराटे ने 16 साल जेल में बिताए और 2006 में जमानत पर रिहा हुआ. उसकी रिहाई का आदेश भारत के सर्वोच्च न्यायालय से आया था. कोर्ट ने कराटे को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत जमानत दे दी. उसकी रिहाई के बाद JKLF (जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) ने फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा कर उसका स्वागत किया. वर्तमान में सामूहिक हत्यारा बिट्टा कराटे टेरर फंडिंग के आरोप में 2019 से एनआईए की हिरासत में है. पुलवामा हमले के बाद उसे हिरासत में भेज दिया गया था. सरकार ने JKLF पर भी प्रतिबंध लगा दिया.