The Kashmir Files: “जिहादियों के लिए आधी रात को खुली थी अदालत, लेकिन हमें सुनने वाला भी कोई नहीं”, कश्मीर के हिन्दुओं की आवाज़ बने अनुपम खेर

अनुपम खेर हूं. पात्र बनता हूं. अभिनय करता हूं. हंसाता हूं. रुलाता हूं. यही मेरा सारांश है. लेकिन इस बार मैं कोई पात्र नहीं बना. मैंने अभिनय नहीं किया और ‘द कश्मीर फाइल्स’ कोई डायलॉग भरी कहानी भी नहीं है.

90 के दशक में कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार किसी से छुपा नहीं है. इसी मुद्दे पर आधारित विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों चर्चा में है. फिल्म में कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार को और पलायन को बहुत ही भावुक तरीके से दिखाया गया है. 500 से भी ज्यादा फिल्में करने वाले अनुपम खेर ने भी इसमें भूमिका निभाई है. इसके अलावा फिल्म में दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और पुनीत इस्सर भी हैं. अनुपम खेर ने सोशल मीडिया के जरिए कश्मीरी हिंदुओं का आवाज और चेहरा बनने की बात कही है. साथ ही उन्होंने यह बताया है कि कैसे देश की पूर्व व्यवस्था ने कश्मीर के हिंदुओं की उपेक्षा की.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo और ट्विटर पर उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें उन्होंने कहा है, “आज मैं सिर्फ अभिनेता नहीं रहा हूं. मैं गवाह हूं और द कश्मीर फाइल्स मेरी गवाही है. वह सब कश्मीरी हिंदू जो या तो मार डाले गए या जीते जी एक शव की तरह जीने लगे. अपने पुरखों की जमीन से उखाड़ कर फेंक दिए गए. आज भी वह न्याय को तरस रहे हैं. अब मैं उन सब कश्मीरी हिंदुओं की जुबान और चेहरा हूं.

वीडियो की शुरुआत में अनुपम खेर कहते हैं, “ईश्वर की कृपा और आप सब के प्यार और आशीर्वाद से मैं 522 फिल्में कर चुका हूं. अनुपम खेर हूं. पात्र बनता हूं. अभिनय करता हूं. हंसाता हूं. रुलाता हूं. यही मेरा सारांश है. लेकिन इस बार मैं कोई पात्र नहीं बना. मैंने अभिनय नहीं किया और ‘द कश्मीर फाइल्स’ कोई डायलॉग भरी कहानी भी नहीं है.

अनुपम खेर ने कश्मीरी पंडितों की बात करते हुए कहा है, “32 साल पहले लाखों कश्मीरी हिंदू तहस-नहस कर दिए गए थे. मेरे हाथ, पांव, बाजू ये शरीर जैसे रातों रात जिहाद में रंग डाला. 90 करोड़ का यह भरा-पूरा देश बेखबर रहा. पुलिस मानव गायब हो गई. मीडिया गूंगी बहरी हो गई. सेना छावनीयों में पड़ गई और कश्मीर हम हिंदुओं से खाली करा लिया गया.

वे आगे कहते हैं, “कश्मीरी पंडितों के पलायन पर कोई जांच नहीं हुई. आज तक कोई आयोग नहीं बैठा. कोई मुकदमा नहीं चला. कोई दोषी नहीं पाया गया. किसी को सजा नहीं हुई. हां, मुद्दा जरूर चला गया. लेकिन जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमें सुनने से भी मना कर दिया गया. अनुपम खेर ने अपने लिए इस फिल्म का महत्व बताते हुए कहा है, “द कश्मीर फाइल्स” फिल्म से कहीं बढ़कर आप सबकी अंतरात्मा की अदालत में हम कश्मीरी हिंदुओं की दस्तक है. मैं अनुपम खेर नहीं हूं. मैं अब पुष्कर नाथ हूं. आप सब तक पहुंचने के लिए छटपटा रहा हूं. मुझसे मिलिए द कश्मीर फाइल्स में…”

बता दें कि कुछ समय पहले अनुपम खेर ने इस फिल्म को लेकर अपनी मां की भावनाओं को भी लोगों के साथ शेयर किया था. उस वीडियो में उनकी मां दुलारी यह करती हुई नजर आई थीं, “मुझे सब कुछ पता है, क्या किया उन्होंने ? जिसने भी यह फिल्म बनाई, उसने बहुत अच्छा किया. हम हिंदुओं के लिए बहुत अच्छा किया. मोदी तो बेचारा कर ही रहा है. लेकिन इस फिल्म से पता चलेगा कश्मीरियों के साथ क्या हुआ. अब तक बाहर वालों को क्या पता कि हमारे साथ क्या हुआ था. वह लोग तो हमारी दौलत हमारा सामान सब कुछ ले गए. सबको ऐसे निकाला जैसे फकीर हूं.

बता दें कि द कश्मीर फाइल्स रिलीज हो चुका है. द फ्रंट फेस इंडिया की पूरी टीम आपसे निवेदन करती है कि आप सब इस फिल्म को देखने और कश्मीरी हिंदुओं के दर्द को समझने के लिए थिएटर जरूर जाएं.

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