Raj Kapoor Birth Anniversary: भारतीय सिनेमा के ‘शोमैन’ राज कपूर का आज जन्मदिवस, जानें उनकी 5 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों के बारे में

फिल्म अभिनेता, निर्माता और निर्देशक राज कपूर जिन्हें भारतीय सिनेमा और मनोरंजन के इतिहास में सबसे महान ‘शोमैन’ माना जाता है, अगर आज जीवित होते तो 97 वर्ष के हो जाते. इस महान अभिनेता का जन्म पेशावर में पिता-अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के घर हुआ था और उनकी पत्नी का दो दशकों से अधिक समय तक शानदार करियर रहा और उन्होंने भारत में 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 11 फिल्मफेयर पुरस्कारों सहित कई पुरस्कार अपने नाम किए. दस साल की उम्र में, वह पहली बार 1935 की ‘इंकलाब’ में नाम की हिंदी फिल्म में दिखाई दिए थे. आइए उनकी कुछ सर्वश्रेष्ठ फिल्मों के बारे में जानते हैं, जिसने उन्हें एक अदम्य सितारा बना दिया-

1. ‘मेरा नाम जोकर’ (1970)

राज कपूर साहब ने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाने के अलावा निर्देशक का काम भी किया था. फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे लंबी फिल्मों में से एक माना जाता है और दूसरी हिंदी फिल्म जिसमें दो इंटरवल होते हैं, पहली फिल्म संगम (1964) है. यह फिल्म एक जोकर के जीवन पर आधारित है जो अपने दुखों का इस्तेमाल अपने दर्शकों को हंसाने के लिए करता है. इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को ‘जीना यहां मरना यहां’, ‘ऐ भाई जरा देख के चलो’, ‘जाने कहां गए वो दिन’ जैसे और भी सदाबहार गाने दिए. इस फिल्म से ऋषि कपूर ने भी बॉलीवुड में डेब्यू किया था.

2. ‘संगम’ (1964)

इस रोमांटिक फिल्म का निर्देशन, निर्माण और डायरेक्शन राज कपूर ने आर. के. स्टूडियो में किया था. कपूर के अलावा, फिल्म में वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार लीड रोल में दिखे थे, जिसमें इफ्तेखार, राज मेहरा, नाना पलसीकर, ललिता पवार, अचला सचदेव और हरि शिवदासानी सपोर्टिंग रोल में दिखे थे. फिल्म सुंदर (कपूर) की कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका प्यार राधा (वैजयंतीमाला) द्वारा रिजेक्ट कर दिया जाता है. फिर वह एक पायलट बनकर उसके लिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए निकल पड़ता है. वह अंततः उससे शादी करने का प्रबंधन करता है, लेकिन इस बात से अनजान है कि वह अपने सबसे अच्छे दोस्त (राजेंद्र कुमार) से शादी करने की प्लानिंग कर  रही थी. इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को ‘हर दिल जो प्यार करेगा’, ‘दोस्त दोस्त ना रहा’ जैसे और भी सदाबहार गाने दिए.

3. ‘श्री 420’ (1955)

यह कॉमेडी-क्राइम और ड्रामा फिल्म 1955 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी और इस फिल्म में मुकेश द्वारा गाया हुआ गाना ‘मेरा जूता है जापानी’ उस समय लोकप्रिय और नए स्वतंत्र भारत का देशभक्ति का प्रतीक बन गया था. फिल्म का निर्देशन और निर्माण कपूर ने ख्वाजा अहमद अब्बास द्वारा लिखित एक कहानी से किया था. फिल्म में नरगिस, नादिरा और कपूर मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म राज कपूर पर केंद्रित है, जो एक गरीब लेकिन शिक्षित अनाथ है जो सफलता के सपने लेकर बॉम्बे आता है. कपूर का चरित्र चार्ली चैपलिन के “लिटिल ट्रैम्प” से प्रभावित है, जो कपूर के 1951 के ‘आवारा’ के चरित्र की तरह है. फिल्म ने भारतीय सिनेमा को सबसे प्रतिष्ठित गीतों में से एक ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ भी दिया था.

4. ‘आवारा’ (1951)

इस क्राइम-रोमांटिक और ड्रामा फिल्म का प्रोडक्शन और डायरेक्शन दोनों राज कपूर द्वारा किया गया था. कहानी ख्वाजा अहमद अब्बास द्वारा लिखा गया था. इसमें राज कपूर के साथ उनके पिता पृथ्वीराज कपूर, साथ ही नरगिस, लीला चिटनिस और केएन सिंह मेन लीड में हैं. कपूर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी विशेष रूप से अभिनय किया था, जिसमें राज कपूर के सबसे छोटे भाई शशि कपूर, जो उनके रोल के छोटे संस्करण की भूमिका निभाते हैं, और पृथ्वीराज के पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर, उनकी एकमात्र फिल्म अपीयरेंस में एक कैमियो भूमिका निभाते हैं. फिल्म का संगीत शंकर जयकिशन ने दिया था. आवारा को बॉलीवुड के इतिहास में माईलस्टोन माना जाता है.

5. ‘तीसरी कसम’ (1966)

यह कॉमेडी-रोमांटिक ड्रामा बासु भट्टाचार्य द्वारा निर्देशित और गीतकार शैलेंद्र द्वारा निर्मित है. यह हिंदी उपन्यासकार फणीश्वरनाथ रेणु की लघु कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित है. फिल्म में राज कपूर और वहीदा रहमान मुख्य भूमिका में हैं. शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने फिल्म के स्कोर की रचना की. यह एक भोले-भाले बैलगाड़ी चालक हीरामन (कपूर) की कहानी है, जिसे एक थिएटर की डांसर हीराबाई (वहीदा रहमान) से प्यार हो जाता है. ‘तीसरी कसम’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था.

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