Movie Review: कार्तिक की ज़बरदस्त कॉमेडी टाइमिंग और साथ में ‘आमी चे तोमार’, फुल फैमिली एन्टरटेनर है भूल-भुलैया 2

काला रंग सभी को पसंद है लेकिन सिर्फ कपड़ों में, बाकि चीजों के आगे काला लिखने से यही काला रंग प्यार की जगह डर में बदल जाता है. जैसे काली रात, काला साया और सबसे खतरनाक काला जादू. बस इसी लास्ट वाले जादू-टोने से पैदा हुई है, बॉलीवुड की एक नई फिल्म जिसका नाम है भूल-भुलैया 2, जिसके ऊपर फर्स्ट पार्ट को मैच करने का काफी प्रेशर है. कहानी एक भूतिया हवेली की है जिसमें 18 सालों से एक बुरी आत्मा कैद है जिसका नाम है मंजुलिका. इनका गाना ‘आमी चे तोमार’ काफी फेमस है. साथ में ऐसी बातें भी खूब सुनने को मिलती हैं कि इन्होने परिवार के 8 सदस्यों को नर्क का मेहमान बना दिया है.

फिर इस भुतिया हवेली में रूह बाबा के कदम पड़ते हैं. बन्दे को ऊपरवाले ने खुद एक अनोखी शक्ति दी है, जिसको आप सिक्स सेन्स बोल सकते हैं. इसका मतलब रूह बाबा मरे हुए इंसान से भी बात कर सकते हैं. कहानी में ट्वीस्ट ये है कि लोग मंजुलिका को भूत समझते हैं लेकिन घर की सुन्दर सी बेटी की तस्वीर पर फूलों की माला क्यों चढ़ी होती है? कहीं ऐसा तो नहीं की मंजुलिका सिर्फ धोखा है और असली भूत कोई और है जो जिंदा लोगों के बीच में कई सालों से जिंदा होने का नाटक कर रहा है. सच पता लगाने की ज़िम्मेदारी रूह बाबा की है जो आजकल खुद न जाने क्यों मंजुलिका वाला गाना गा रहे हैं.

बात करें नेगेटिव पॉइंट्स की तो फिल्म में सिर्फ दो गलतियाँ हैं. सबसे पहले तो आप ये समझिये की ये फिल्म 2007 वाली भूल-भुलैया से बिल्कुल अलग है, इन दोनों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं मिलेगा. वो फिल्म साईकोलॉजिकल हॉरर थी और इस नई वाली फिल्म में गन्दी शक्लों और खतरनाक आवाज़ों से डर पैदा करने की कोशिश की गयी है. ऐसे समझिये की हॉरर फिल्म वो ज्यादा अच्छी होती है जिसमें किसी भूत को दिखाया न जाए बल्कि कोई आएगा, कोई आ सकता है, बस ये ख्याल मन में रहे तो डर बना रहता है. लेकिन इस फिल्म के हर दूसरे-तीसरे सीन में आपकी मुलाकात मंजुलिका से होती रहती हैं जिसकी वजह से डर ख़तम सा होने लगता है. दूसरी गलती है ग्लैमर ओवर कंटेंट वाली. मतलब आप महल में रहने वाले भूत की कहानी सुना रहे हों और अचानक से हीरो-हेरोइन निकल जाते हैं इश्क की पतंग लड़ाने वो भी 3-4 मिनट के गाने के साथ. इससे कहानी के साथ जो कनेक्शन जुड़ा होता है वो बीच में कमज़ोर हो जाता है. जरूरी नहीं है हर फिल्म ढाई-तीन घंटे लम्बी बनाई जाए और उसमें ज़बरदस्ती 3-4 गाने घुसाए जाएँ.

बात करें पॉजिटिव चीजों की तो उनकी शुरुवात कार्तिक आर्यन के नाम से ही हो जाती है. फिल्म में कार्तिक की कॉमेडी टाइमिंग ज़बरदस्त है. भले ही कुछ डायलाग फालतू टाइप के हों लेकिन कार्तिक आर्यन जिस तरीके से उन्हें बोलते हैं वो आपको हसाएंगे जरुर. पूरे फर्स्ट हाफ में कार्तिक फिल्म को अपने इशारों पर नचाते हैं. उनकी एक्टिंग इतनी दमदार है जिसके सामने फिल्म की छोटी-मोटी कमियां गायब सी हो जाती हैं. फिल्म की कहानी फर्स्ट पार्ट जितनी दमदार तो नहीं लेकिन सरप्राइसिंग तो काफी है जिसमें कई सारे ट्वीस्टस देखने को मिलेंगे.

कहानी में लॉजिक का भी काफी ध्यान रखा गया है. मंजुलिका कौन है से लेकर लोग उससे क्यों डरते हैं ये सारी चीजें सीक्वेंस में समझाई गईं हैं. सपोर्टिंग रोल में जितने एक्टर्स हैं उन्होंने सिचुएशन को इतना फनी बना दिया कि हंसने के लिए डायलाग्स की जरूरत पड़ती ही नहीं. तब्बू ने फिल्म में ज़बरदस्त काम किया है. यकीन मानिये इस फिल्म को आप सिर्फ कार्तिक आर्यन के लिए देखने जायेंगे लेकिन ढाई घंटे बाद जब आप थिएटर्स से बाहर निकलेंगे तो आपके शब्दों में सबसे ज्यादा ज़िक्र तब्बू का ही होगा.

फर्स्ट पार्ट से कम्पेयर करके फिल्म को नीचे गिराने का कोई मतलब नहीं है. ये फिल्म बिलकुल अलग है. उनसे भी दूसरी बनायें जो फिल्म को मास्टरपीस या बेस्ट फिल्म ऑफ़ 2022 बोल रहे हैं. सच बात ये है की भूल-भुलैया 2 एक फैमिली एन्टरटेनर है जिसमें डर ज्यादा लगे न लगे लेकिन कार्तिक की कॉमेडी और कहानी में डाले गए ट्वीस्ट्स आपको पैसा वसूल जरुर फील कराएंगे.