पद्मश्री से सम्मानित हुए 90s के दौर के चाणक्य, कहा- “कभी लगा था राष्ट्रवाद का आरोप, आज मिल रहा है सम्मान”

इस वर्ष कई लोगों को पद्म पुरुस्कारों से नवाजा गया है. उन लोगों की लिस्ट में एक नाम चन्द्रप्रकाश द्विवेदी का भी है. चन्द्रप्रकाश फिल्म निर्देशक होने के साथ साथ पटकथा लेखक भी हैं. इन्हें पद्मश्री से नवाजा गया है. चन्द्रप्रकाश ने 90s के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक ‘चाणक्य’ का निर्देशन किया था. इसके साथ ही चाणक्य की भूमिका भी इन्होने ही निभाई थी. उस दौर में चाणक्य को घर-घर पहुँचाने का काम इसी धारावाहिक ने किया था.

चन्द्रप्रकाश ने ‘मृत्युंजय’, ‘एक और महाभारत’, ‘उपनिषद गंगा’ जैसे शो भी बनाए हैं. उनके द्वारा निर्देशन की जाने वाली फिल्मों की बात करें तो इसमें ‘पिंजर’, ‘जेड प्लस’, ‘मोहल्ला अस्सी’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं. इनकी आने वाली फिल्मों में ‘पृथ्वीराज’ शामिल है. महाराजा पृथ्वीराज चौहान की इस कहानी में अक्षय कुमार मुख्य भूमिका रहे हैं. वे अक्षय कुमार की फिल्म ‘राम सेतु’ को प्रोड्यूस भी कर रहे हैं.

पद्मश्री से सम्मानित होने को लेकर निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने खुशी जताई और कहा “मुझे हमेशा लगता है कि ऐसे सम्मान आपको अधिक रिस्क भरे प्रोजेक्ट लेने के लिए ताकत और साहस देती हैं. मैं ऐतिहासिक काम करता रहा हूं, मैंने कभी किसी अन्य चीज को आगे बढ़ाने के बारे में नहीं सोचा था. लेकिन जब आपको आपकी सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है, तो आपको लगता है कि आपको इसे और अधिक करना है, और इस क्षेत्र में और लोगों को बनाना है. ”

द्विवेदी कहते हैं, ”शुरुआत में यह उत्साह हमेशा बना रहता है. एक बार जब मुझे अपनी फिल्म पिंजर (2003) के लिए राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, तो मुझे खुशी हुई कि मैं वहां पहुंचा. अब एक और पहचान है, मैं फिर से खुश हूं.”

‘आज तक’ से द्विवेदी ने कई मुद्दों पर बात की है. इस दौरान हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्मों में राष्ट्रवाद क्यों नहीं होना चाहिए? अगर यह नहीं होगा तो क्या लोग अमेरिका या इंग्लैंड का एजेंडा लेंगे? उन्होंने क्रिटिक को लेकर भी बात की. कहा कि पहले समीक्षक फिल्म मेकर्स को डराया करते थे. लेकिन अब सोशल मीडिया पर लोग खुल कर बात करने लगे हैं. इसलिए क्रिट्क्स द्वारा एक या दो स्टार देने वाले फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा देती है.

उन्होंने कहा, “जब से ये फेसबुक व सोशल मीडिया आया है, उन्होंने औकात दिखा दी है क्रिटिक्स को. जिसे एक या दो स्टार मिलते हैं, वैसी फिल्म बॉक्स ऑफिस के रेकॉर्ड्स तोड़ रही हैं. आपके रिव्यू का सम्मान है, लेकिन आप कोई ब्रह्म वाक्य नहीं लिख रहे हैं. जब मैंने चाणक्य बनाई थी, तो मुझ पर भी नेशनलिस्ट का आरोप लगा. आज चाणक्य कल्ट माना जाता है.” 

इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा अपने फेवरेट लोगों को अवॉर्ड देने के आरोप को भी नकारा. उन्होंने कहा कि जब आपकी जमीन मजबूत होती है और आप सच बोलते हैं तो कोई सरकार आपको बाध्य नहीं कर सकती. चाणक्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कॉन्ग्रेस की सरकार थी और उन्हें विरोध झेलना पड़ा था. लेकिन जब पिंजर के लिए अवॉर्ड मिला तब भी कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी. इसी तरह जब मोहल्ला अस्सी को लेकर विवाद हुआ उस समय भाजपा की सरकार थी.

बता दें कि चंद्रप्रकाश द्विवेदी का जन्म साल 1960 में राजस्थान के सिरोही जिले में हुआ था. द्विवेदी पेशे से एक डॉक्टर हैं. लेकिन साहित्य और इतिहास में गहरी रूचि के चलते उन्होंने डॉक्टरी का पेशा छोड़ थिएटर से अपना करियर शुरू किया था.

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