Apaharan 2 (Review): हिंदी फिल्मों के गानों से लबालब भरी है वेब सीरीज, उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी कमजोर स्टोरी राइटिंग

90s के दौर में जगमोहन देसाई की फ़िल्में तो आप सभी को याद होंगी. अरे वही, जिसमें बचपन में बच्चे बिछड़ जाते हैं और जवानी में आकर मिल जाते हैं. इसके साथ ही फिल्मों में गाली का कांसेप्ट अनुराग कश्यप ने 2012 में ‘गैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर’ से ही दे दिया था. ज्यादा कुछ तो नहीं, ‘अपहरण-2’ बस इन्हीं दो डायरेक्टर्स के फिल्मों का मिश्रण है.

अरुणोदय सिंह हमेशा से से बेहतरीन एक्टर्स में शामिल रहे हैं. कुछ साल पहले रिलीज़ हुई वेब सीरीज ‘अपहरण’ लोगों को जितनी पसंद आई थी. सीजन 2 ने दर्शकों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया. इस बार भी कहानी उसी ईमानदार पुलिस ऑफिसर रूद्र श्रीवास्तव की है. वही रुद्र, जो पिछले सीज़न, अपनी ईमानदारी के चक्कर में कई लफड़ों में पड़ा. मगर इस बार मुसीबत का कारण उसकी बीवी रंजना बनती है. रूद्र की शादीशुदा ज़िंदगी में वैसे भी कुछ ठीक नहीं हो रहा होता. उधर उसके ऑफिस वाले रुद्र को रॉ का एजेंट बनाकर सर्बिया भेज देते हैं. एक खूफिया मिशन पर. रॉ (Raw) की नाक में दम कर रहे क्रिमिनल बिक्रम बहादुर शाह यानी बीबीएस को किडनैप करने के मिशन पर. अब रुद्र वहां कैसे पहुंचता है, बीबीएस को कैसे मारता है, क्या-क्या ट्विस्ट एंड टर्न होते हैं इसके लिए आपको देखनी होगी अपहरण-2

एक्टिंग

एक्टिंग की बात करें तो इस सीज़न में भी रुद्र की वाइफ रंजना यानी निधी सिंह सारा अटेंशन ले गईं. हालांकि इस बार उन्हें स्क्रीन टाइम कम मिला. लेकिन जितना मिला, उसमें उन्होंने जी-जान लगा दी. नशे में धुत्त होकर गाना गाने का सीन हो, या रुद्र की सच्चाई जानकर भय वाला दृश्य. निधि की स्क्रीन टाइमिंग बढ़िया है.

गिलौरी बनी स्नेहिल दीक्षित का बस एक ही डायलाग याद रहता है. जिसमें वे कहती हैं, “ए जी गाली दे रहा है.” करने को उनके पास बहुत कुछ था लेकिन साढ़े चार घंटे बस एक डायलाग और हीरो के इर्द गिर्द घूमते ही बीत जाता है.

अपहरण सीरीज के सूत्रधार अरुणोदय सिंह यानी इंस्पेक्टर रूद्र श्रीवास्तव अपने एक्टिंग में खरे उतरे हैं. पिछले सीजन में उनका केवल एक ही किरदार था, जो कि खुद के परिवार और नौकरी के बीच उलझा रहता है. लेकिन इस बार अरुणोदय सिंह ने ग्रे शेड को भी बखूबी निभाया है. लेकिन अच्छी एक्टिंग के बावजूद डायरेक्शन और स्टोरी राइटिंग में कमी के वजह से सीरीज कम्पलीकेटिंग हो जाती है.

रॉ ऑफिसर भंडारी बने एक्टर उज्जवल चोपड़ा का काम बस नाम मात्र का है. उनके हिस्से ज्यादा स्क्रीन्स नहीं आए हैं. उनके लिए भी करने को बहुत कुछ था, लेकिन स्टोरी राइटिंग के वजह से उन्हें करने को कुछ खास नहीं मिला. दूबे बने सानंद वर्मा ने भी अच्छा काम किया है. सीरीज में चल रहे खून खराबे के बीच कॉमेडी के लिए इन दोनों का काम अच्छा है. स्नेहिल दीक्षित उभरती हुई यूट्यूबर हैं, जिन्हें स्क्रीन पर काफी देर तक उपस्थित रहना था, लेकिन ऐसा होता नहीं है. फिल्म के लास्ट में एक्टर जितेन्द्र का भी छोटा लेकिन दमदार रोल है.

वीबीएस की पत्नी बनी नफीसा यानी सुखमनी को देखकर रेड नोटिस की गैल गैडोट की याद आ जाएगी. जिसमें वे एक लड़की को छत से लटकाकर जिन्दा जला देती हैं. लास्ट में उनका एक फाइट सीन भी दिखाया गया है जिसे कुछ सेकंड्स के लिए और बड़ा करना चाहिए था और उनके नेगेटिव रोल की एंडिंग थोड़ी बड़ी होनी चाहिए थी. लेकिन उसे भी मात्र कुछ सेकंड्स में ही निपटा दिया गया. बैकग्राउंड म्यूजिक जगह जगह पर काफी लाउड है. और कई जगहों पर तो बेवजह गालियां भरना भी सीरीज पर काफी भारी पड़ा है.

स्टोरी राइटिंग

सीरीज की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी स्टोरी राइटिंग है. स्टोरी लिखने वाले राइटर सिद्धार्थ सेनगुप्ता बालिका वधू के डायरेक्टर रह चुके हैं और पिछले साल ही इनकी लिखी सीरीज़ अनदेखी भी आई थी. जो एक क्राइम सीरीज़ थी. नेटफ्लिक्स पर आई ये काली-काली आंखें के डायरेक्टर भी रह चुके हैं. ऐसा लगता है कि अपहरण 2 को लिखने की उन्हें बहुत जल्दी थी इसलिए बस किसी भी तरह टीप-टाप के काम खत्म कर दिया. क्योंकि इस सीरीज़ में राइटिंग बहुत कमज़ोर कड़ी साबित होती है. स्टोरी टेलिंग भी आपको बांधे नहीं रख पाती.

कहानी में ट्विस्ट तो है मगर वो 90 के दशक में आई फिल्मों की याद दिलाता है. मेन कैरेक्टर रुद्र को आधी सीरीज़ के बाद अचानक से कमज़ोर बना दिया जाता है. उसे कुछ याद नहीं रहता, वो बीबीएस के ही चंगुल में फंस जाता है.

फिल्म के क्लाइमेक्स में रूद्र और वीबीएस का एक फाइटिंग सीन है. जिसमें दोनों के चेहरे पर रंग लग जाता है. जिसे देखकर शाहरुख़ खान के फिल्म ‘डुप्लीकेट’ की याद आती है. क्लाइमेक्स सीन को पूरी तरह उलझाकर रखा गया है. कुल मिलाकर ‘अपहरण – 2’ पुरानी फिल्मों का मिक्सप लगता है. इसे देखने के लिए आपके 4.5 घंटे काफी महत्वपूर्ण हैं. यदि आप इसे नहीं भी देखते हैं तो आपको यह अफ़सोस जरा सा भी नहीं होगा कि आपने एक बेहतरीन सीरीज को मिस कर दिया.

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