Basant Panchami 2022: क्या है बसंत पंचमी पर्व का महत्व? क्यों पहनते हैं इस दिन पीले वस्त्र?

बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. इसके आगमन की शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से होती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी प्रत्येक वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है. इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है. इसके अलावा इस दिन पीले वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं क्यों?

क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी?

मां सरस्वती को हिंदू धर्म में ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है. पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. अन्य मान्यता के अनुसार इस त्योहार को सर्दियों के अंत और वसंत के स्वागत के रूप में भी चिह्नित किया जाता है.

क्यों पहनते हैं पीले कपड़े?

माना जाता है कि जब सरस्वती ने अवतार लिया था तब ब्रह्मांड में एक लाल, पीली और नीली आभा थी. पीली आभा पहले दिखाई दे रही थी. वहीं, मां सरस्वती का प्रिय रंग पीला है इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. मगर, इस दिन काले, लाल या गहरे रंग के कपड़े न पहनें. इस दिन प्रेम के देवता कामदेव की भी पूजा की जाती है.

बसंत पंचमी और पीला रंग

‘पीला’ इस त्योहार का प्रमुख रंग है क्योंकि यह फलों और फसलों के पकने का प्रतीक है. उत्तर भारत में सरसों के खेत इस मौसम में खिलते हैं और प्रकृति को एक पीला कोट देते हैं. लोग पीले कपड़े पहनते हैं, देवी को पीले फूल चढ़ाते हैं और माथे पर पीले, हल्दी का तिलक लगाते हैं. इसके अलावा पीला रंग शिक्षकों, ज्ञान और शुभता के साथ गहराई से भी जुड़ा हुआ है. इस दिन छात्र अपनी नोटबुक, कलम और शैक्षिक सामान देवी सरस्वती की मूर्ति के पास रखते हैं और उनका आशीर्वाद पाने के लिए मां सरस्वती का जाप करते हैं.

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