क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर दूध ? जानें रोचक कथा

आपने मंदिरों में शिवलिंग पर दूध जरुर चढ़ाया होगा. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव बड़े भोले हैं और केवल बिल्व पत्र, जल, दूध, अक्षत आदि चीजों को भेंट से प्रसन्न हो जाते हैं। क्या आपने कभी यह सोचा है कि भगवान शंकर की शिवलिंग पर आखिर दूध क्यों चढ़ाया जाता है? आज हम आपको यही बताने वाले हैं –

समुद्र मंथन से निकला अमृत और विष

दरअसल एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण स्वर्ग श्रीहीन (ऐश्वर्य, धन, वैभव आदि) हो गया. उस वक़्त सभी देवतागण प्रभु विष्णु के पास गए. भगवान विष्णु ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का उपाय बताया. इसके साथ ही यह भी बताया कि समुद्र मंथन से अमृत निकलेगा, जिसे ग्रहण कर सभी देवता अमर हो जाएंगे. जब देवताओं ने यह बात असुरों के राजा बलि को बताई तो वे भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए. वासुकि नाग की नेती बनाई गई और मंदराचल पर्वत की सहायता से समुद्र को मथा गया. समुद्र मंथन से उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, लक्ष्मी, भगवान धन्वन्तरि सहित 14 रत्न निकले.

भगवान शिव ने किया विषपान, फिर…..

इस समुद्र मंथन से पहले कालकूट विष निकला, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण कर लिया. विष का पान करते समय माता पार्वती ने शिवजी का गला दबाकर रखा था जिस कारण वह विष गले से नीचे नहीं उतर सका. विष ग्रहण करने के बाद भगवान शिव के गले में जलन होने लगी. तब देवताओं ने उन्हें दूध पीने के लिए दिया. दूध पीते ही भगवान शंकर को आराम मिला. तभी से देवों के देव महादेव को दूध चढ़ाने की प्रथा चली आ रही है.

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