आन्ध्र प्रदेश के इस मंदिर में प्रतिमा से आता है पसीना, जानें चौकाने वाले 10 रहस्य

आन्ध्र प्रदेश में चित्तूर जिले के तिरुपति के निकट तिरूमाला पहाड़ी पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां भगवान विष्णु तिरुपति बालाजी के रूप में विराजमान हैं.  भगवान विष्णु को अनेक रूपों में पूजा जाता है. कहीं श्रीराम के रूप में तो कहीं श्रीकृष्ण के रूप में. तिरुपति बालाजी भी भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं. इस मंदिर को देश का सबसे अमीर मंदिर होने का भी दर्जा प्राप्त है क्योंकि यह एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां सबसे अधिक चढ़ावा आता है. तमिल भाषा में तिरू अथवा थिरू शब्द का वही अर्थ है जो संस्कृत में श्री है. श्री शब्द, धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी के लिए प्रयुक्त होता है. आइये जानते हैं इस  मंदिर के 10 चौंकाने वाले रहस्य-

1. प्रतिमा से आता है पसीना: इस मंदिर में विराजमान बालाजी की जीवंत प्रतिमा एक विशेष पत्थर से बनी हुई है. ऐसा कहा जाता हैं कि बालाजी की प्रतिमा को पसीना आता है और उनकी प्रतिमा पर पसीने की बूंदें स्पष्‍ट रूप से देखी जा सकती हैं. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है. इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर में तापमान कम रखा जाता है.

2. रहस्यमयी आवाज : कहते हैं कि भगवान वेंकेटेश्वर की प्रतिमा पर कान लगाकर सुनें तो भीतर से समुद्र की लहरों जैसी ध्वनि सुनाई देती है. यह आवाज कैसे और किसकी आती है यह रहस्य अभी तक बरकरार है.

3. बालाजी के बाल : कहते हैं कि भगवान वेंकेटेश्वर के सिर के बाल असली हैं जो कभी उलझते नहीं हैं और हमेशा मुलायम बने रहते हैं. यह बाल कैसे असली है इसका रहस्य बताना मुश्‍किल है.

4. वस्त्र : यहां बालाजी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने की यहां परम्परा है. इसकी भी एक वजह है, कहते हैं कि भगवान के इस रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं इसीलिए बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और ऊपर साड़ी से सजाया जाता है.

5. स्वामी पुष्करणी कुंड : विष्णु भगवान ने कुछ समय के लिए तिरुमला स्थित स्वामी पुष्करणी नामक कुंड के किनारे निवास किया था. आज भी यह कुंड विद्यमान है जिसके जल से ही मंदिर के सभी कार्य सम्पन्न होते हैं.

6. हृदय में लक्ष्मीजी : प्रत्येक गुरुवार को बालाजी के वस्त्र और श्रृंगार हटाकर स्नान कराने के पश्चात् चंदन का लेप लगाया जाता है और जब ये लेप हटाया जाता है तो बालाजी के हृदय में मां लक्ष्मी जी की आकृति दिखाई देती है.

7. मध्य भाग में बालाजी : बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि वे दाईं तरफ के कोने में खड़े हैं, जबकि बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े हैं.

8. छड़ी से बालाजी की पिटाई : मंदिर में दाहिनी ओर एक ऐसी छड़ी रखी है जिससे बचपन में कभी बालाजी की पिटाई की जाती थी. पिटाई करने से इस छड़ी से भगवान की ठोड़ी पर चोट लग गई थी. इसी कारण उनकी ठोड़ी पर चंदन का लेप लगाया जाता है.

9. अखंड दीपक : बालाजी के मंदिर में एक दीपक हमेशा जलता रहता है. आश्चर्य यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता. यहां तक कि ये भी नहीं ज्ञात है कि दीपक को सबसे पहले कब और किसने प्रज्वलित किया था.

10. पचाई कर्पूर : भगवान बालाजी पर पचाई नामक कर्पूर लगाया जाता है. इस कपूर के बारे में कहा जाता है कि ये किसी भी पत्थर पर लगाया जाता है तो पत्थर में कुछ समय में दरार पड़ जाती है, परंतु भगवान बालाजी की मूर्ति पर इस पचाई कर्पूर का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

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