इस साल भी स्थापित नहीं हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति, काशी विश्वनाथ दल ने मां अन्नपूर्णा को अबीर चढ़ाकर निभाई परंपरा

वाराणसी. रंगभरी एकादशी के एक दिन पूर्व श्री काशी विश्वनाथ में स्थित माता लक्ष्मी-के चरणों मे अबीर गुलाल चढ़ाने की परंपरा रही है, पर दो वर्षों से कॉरिडोर निर्माण के चलते अभी तक मां लक्ष्मी की प्रतिमा को दोबारा स्थापित नहीं किया गया है, जिसके चलते काशी विश्वनाथ दल ने रविवार को लगातार दूसरे साल मां अन्नपूर्णा के चरणों में अबीर-गुलाल चढ़ाया.

काशी विश्वनाथ दल के अध्यक्ष चंद्रशेखर यादव ने बताया कि रंगभरी एकादशी के पूर्व परं मां को अबीर-गुलाल चढ़ाने की पंरपरा है. ये परंपरा वर्ष 1952 से चली आ रही है. पिछले वर्ष जिलाधिकारी से वार्ता हुई थी तो उन्होंने बताया था कि कॉरिडोर निर्माण के चलते माता लक्ष्मी की प्रतिमा हटाई गई है.

इसलिए ये परंपरा न टूटे इसके लिए विगत दो सालों से हमलोग मां अन्नपूर्णा के चरणों में अबीर चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। 15 को महाश्मशान में हमारी चिताभस्मी होली है. काशीवासियों से यही अपील है कि रंगभरी एकादशी पर सभी बाबा और मां पार्वती के दर्शन को आएं और बाबा के मसाने की होली पर भी आएं.