सूतक काल में पीएम मोदी के दर्शन के लिए विश्वनाथ मंदिर के अर्चक पर जांच शुरू, पूर्व ट्रस्टी ने पत्र लिखकर किया था खुलासा

वाराणसी. श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण पर सूतक काल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूजन कराने में अर्चक पं. श्रीकांत मिश्रा पर लगे आरोपों की जांच शुरू हो गयी है. मंदिर प्रशासन ने अपर कार्यपालक अधिकारी से सभी पक्षों की जानकारी लेकर सोमवार तक रिपोर्ट मांगी है. इस मामले में अर्चक पं. श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि मंदिर प्रशासन की ओर से इस संदर्भ में उनका पक्ष मांगा गया है, उसे जल्द ही उपलब्ध करा दिया जाएगा. मंदिर के मुख्य कार्यकारी डॉ सुनील कुमार वर्मा ने मीडिया को बताया कि अपर कार्यपालक को जांच की जिम्मेदारी दी गई है.

बता दें, विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यासी प्रदीप कुमार बजाज ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पं. श्रीकांत मिश्रा ने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण से पहले पूजा पीएम मोदी से खुद सूतक काल में रहते हुए कराई थी. पूर्व न्यासी प्रदीप कुमार बजाज ने मांग की है कि तथ्यों की जांच कर कार्रवाई की जाए.

उन्होंने शिकायत पत्र में लिखा है कि गत पांच दिसंबर को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में अर्चक श्रीकांत मिश्र के सगे चचेरे भाई रविकांत मिश्र के पुत्र वेदप्रकाश का सड़क हादसे में निधन हो गया था. 18 दिसंबर को वेदप्रकाश का त्रयोदशाह था, जिसमें शामिल होने के लिए उनकी मां और पत्नी नरसिंहपुर गई थीं. ऐसी स्थिति में सूतक काल में रहते हुए सनातन धर्म के अनुसार श्रीकांत मिश्रा पूजापाठ तो दूर मंदिर में प्रवेश करने के भी योग्य नहीं थे. फिर भी उन्होंने इतने बड़े महाआयोजन की पूजा क्यों कराई इस पर जांच होनी चाहिये.

जानिए क्या होता है सूतक काल?

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार यदि किसी के घर में सगे-संबंधी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके घर पर सूतक लग जाता है. मृत्यु से 13 दिन (त्रयोदश/तेरहवीं) तक सूतक काल लगा रहता है. इस समय अवधि में व्यक्ति किसी के घर नहीं जा सकता. यइस समय देव पूजा कर्म और देव स्पर्श नहीं किया जाना चाहिए. इस दौरान मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए पितृ कर्म करने का विधान बताया गया है. धर्म ग्रंथों में सूतक को लेकर काफी विस्तार से बताया गया है कि सूतक किस पर और कितने समय के लिए लागू होता है. इसमें देह त्याग करने वाले व्यक्ति और देह त्याग किस प्रकार से हुआ है इस विषय का भी उल्लेख अलग-अलग स्थानों पर मिलता है.

किस पर लागू होता है सूतक?

सूतक के बारे में विभिन्न शास्त्र और पुराणों में बताया गया है कि गृहस्थ जनों की मृत्यु होने पर उनके सात पीढ़ियों पर सूतक लगता है. बेटियां अधिकतम 3 दिनों में ही सूतक से मुक्त हो जाती हैं. कूर्म पुराण में बताया गया है कि जो लोग संन्यासी हैं, गृहस्थ आश्रम में प्रवेश नहीं किए हैं. जो लोग वेदपाठी संत हैं उनके लिए सूतक का विचार मान्य नहीं होता है. इनके माता-पिता की मृत्यु हो जाने पर भी केवल वस्त्र सहित स्नान कर लेने मात्र से भी इनका सूतक समाप्त हो जाता है.

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