तुलसीघाट से महिषासुर घाट तक बजड़े पर रामायण के पात्रों की दिखेंगी झाँकियाँ, रामनवमी पर निकलेगी रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा

वाराणसी. आज से तीन दशक पूर्व सन 1988 में भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी में श्री रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा की शुरूआत उस समय हुई जब पूरे भारतवर्ष में रामायण धारावाहिक पूरे चरमोत्कर्ष पर था. जैसे ही टीवी पर धारावाहिक प्रारम्भ होता था लोग टीवी के सामने इकट्ठे हो जाते थे और सड़कें सुनसान हो जाती थीं. उसी समय काशी के कुछ प्रबुद्वजनों ने आपस मे विचार विमर्श किया कि रामायण धारावाहिक के पात्रों को काशी में आमंत्रित किया जाये. तब यह संकल्प भारत विकास परिषद वाराणसी ने पूर्ण किया.

रामायण धारावाहिक के सभी पात्र अपनी सम्पूर्ण वेशभूषा के साथ जब मां गंगा के आंचल पर सजे धजे बजड़े पर सवार हुए तो पूरी काशी गंगा तट पर जमा हो गयी. लाखों श्रद्धालुओं ने अस्सी से राजघाट तक मां गंगा के किनारे सीढ़ियों से भगवान श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमानजी एवं रावण के रूप में सजे कलाकारों का नयनाभिराम अवलोकन किया.

यह घटना 1988 की है. तभी संकट मोचन मदिर के मंहत स्व. पूज्य डा. वीरभद्र मिश्र, स्व. डा. भानुशंकर मेहता, स्व0 डा. बांके बिहारी श्रीवास्तव ने यह संकल्प लिया कि प्रतिवर्ष भगवान श्रीराम के जन्मदिवस – रामनवमी के अवसर पर मां गंगा के आंचल पर भगवान श्री राम के जीवन पर आधारित सजीव झांकियां सजे धजे बजड़े पर निकाली जायेंगी. 1988 से अब तक लगातार ‘रामनवमी’ के अवसर पर ‘श्री राम कथा मंदाकिनी शोभायात्रा’ भव्य रूप से तुलसी घाट से प्रारम्भ होकर महिषासुर घाट तक आरती करने के पश्चात समाप्त होती है. तुलसीघाट पर संकट मोचन मंदिर के महंत डा. विश्वभंर नाथ मिश्र सजीव झाकियों की आरती करके यात्रा को रवाना करते हैं.

भगवान श्री राम के विभिन्न रूप की झांकियो के बजड़े पर लगे रंगबिरंगे झालरों से निकलती लाइट जब माँ गंगा की लहरों पर रात्रि में पड़ती है तो ऐसा प्रतीत होता है कि आसमान से सारे तारे नीचे आ गए हों.

रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा हर बार चैत्र नवरात्र के रामनवमी पर निकलती है. इस बार भी ऐसे ही आयोजन श्री रामकथा मंदाकिनी सेवा समिति के द्वारा किया जाना है जो कि रविवार को शाम 4:00 बजे आयोजित होना है.

नोट: यह सारी तस्वीरें पिछले वर्षो की हैं.