“आपको दिख नहीं रहा है ? मस्जिद ढक दिया, मंदिर को विशाल बना दिया” काशी विश्वनाथ कॉरीडोर देख रोने लगा बंगाल से ज्ञानवापी आया नौशाद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरीडोर का उद्घाटन किया. विश्वनाथ धाम की सुन्दरता और भव्यता पूरे विश्व में चर्चा का विषय बनी हुई है. नए कॉरीडोर में अब श्रद्धालु गंगा घाट से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे. जहां पहले गलियों से होकर मंदिर में जाना पड़ता था और लम्बी लाइने लगती थीं. वहीँ, अब एक बार 60-70 हजार श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे. साथ ही जब लोग बाबा की पूजा करेंगे, मां गंगा की स्नेहिल हवा उन्हें स्नेह देगी. कॉरीडोर बनने पर बड़े-बुजुर्गों को आने जाने में सुविधा होगी. 5 हजार वर्ग फीट में फैला मंदिर अब 5 लाख वर्गफीट का हो गया है.

बाबा विश्वनाथ मंदिर की भव्यता हर किसी को मोहित कर रही है. वहीँ इस्लामी कट्टरपंथियों को इससे आपत्ति होती दिख रही है. इस्लाम से जुड़े कुछ विशेष लोगों को लग रहा कि मंदिर का स्वरुप भव्य हो जाने से मस्जिद ढक गया है.

यूट्यूब चैनल यूपीतक ने ज्ञानवापी मस्जिद में आए कुछ लोगों से बातचीत किया. किसी ने विकास कम होने की बात कही तो किसी पर मस्जिद के ढक जाने से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. मोहम्मद शागीर नाम के शख्स ने वाराणसी में हुए विकास के बारे में कहा कि ये सब कुछ वोट के लिए है. विकास कुछ भी नहीं हुआ है.

वहीँ शौकत अली नाम के शख्स ने भी विकास कम होने पर अपनी असहमति जताई. शौकत के अनुसार ये सब बस मंदिर – मस्जिद तक सिमित हैं. वहीँ मो० बिलाल ने कहा कि वाराणसी पूरी तरह बदल गई है. मंदिर मस्जिद की एकता दिखाने के लिए विकास का रूप दिया गया है. हमीद अंसारी ने इस मुद्दे पर कहा कि सिर्फ मंदिर का विकास हुआ है.

पश्चिम बंगाल से आए नौशाद आलम पर मंदिर का भव्य स्वरुप देखते ही जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. नौशाद ने कहा, “कोलकाता से हम यहां नमाज पढ़ने के लिए आए थे. हमको तो ये हालात देखकर समझ में नहीं आ रहा है कि मस्जिद को पूरी तरह से ढक दिया गया और मंदिर को इस तरह से विशाल बनाया गया है. ये क्या है? मैं टूरिस्ट हूँ. मैं यह दर्द महसूस कर सकता हूँ.”

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नौशाद से जब चैनल की एंकर ने सवाल करना चाहा तो उन्होंने आक्रोशित होकर जवाब दिया “आपको दिखाई नहीं दे रहा है? क्या आपको मस्जिद दिख रहा है? मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता. आप लोग सच्चाई को कैसे छुपा सकते हैं? एक चीज को ढक दिया गया और दूसरे को भव्य बनाया गया. यह हिंदुस्तान है. यहाँ लोकतंत्र है. संविधान में कहा गया है कि सबको बराबर का हक है. आप किसी के हक को दबा दीजिएगा, ऐसा होता है क्या? पहली बार मैंने इस मस्जिद में नमाज अदा किया और जो दुख हुआ है, वह मैंने 40 साल के जीवन में कभी महसूस नहीं किया था.”

इतना कहने के बाद नौशाद आलम रोने लगे. एंकर ने उन्हें ढाढस बंधाया और फिर सवाल किया कि आपको क्या लगता है कि एकतरफा विकास हुआ है तो नौशाद ने कहा, “विकास की बात छोड़िए, किसी के अधिकार को दबा दिया गया है.” इसके बाद वह रोने लगे और आगे बात करने से इनकार कर दिया.

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