काशी से श्रीगणेश: 80% मठ-मंदिरों का डेटा तैयार, संसाधन की कमी होने पर पुजारियों को मिलेगा मानदेय

वाराणसी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में -अभी 4 चरणों की वोटिंग बाकी है. ऐसे में हिंदूवादी संगठन और संत समाज एकजुट होने लगे हैं. अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और काशी विद्वत परिषद ने ‘हमारी काशी हमारे देवालय’ महाअभियान के तहत काशी के 108 उपेक्षित मंदिरों में भोग आरती का कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत उपेक्षित मंदिरों के पुजारियों को मानदेय और भोग आरती राशि दी जा रही है. आरती और श्रृंगार के लिए 2,500 रुपया महीना और पुजारी को 5,000 रुपए महीना मानदेय दिया जाएगा. ऐसे में सालभर में लगभग एक करोड़ रुपए की राशि इस पर खर्च होगी. इसका प्रबंधन महानिर्वाणी अखाड़ा करेगा.

अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि देश में करीब 9 लाख मंदिर मठ हैं. राज्य सरकार के पास 4 लाख व केंद्र के पास 5 लाख हैं. देश में 33,800 मंदिर ख्यातिप्राप्त हैं. काशी विश्वनाथ धाम, विंध्याचल बैजनाथ धाम इसी श्रेणी में आते हैं. पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर के मंदिर मठ के डेटा अभी नहीं मिले हैं. देश के उपेक्षित मंदिरों का भी डेटा तैयार कराया जा रहा है, जहां रोजाना भोग आरती बमुश्किल हो पाती है. इन मंदिरों में भी पुजारियों को इसी प्रोजेक्ट के तहत मानदेय दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

उपेक्षित मंदिरों का चयन करने के लिए समिति गठित

श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी व गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा के नेतृत्व में गठित समिति ऐसे मंदिरों का चयन करेगी जो भोग-आरती से वंचित हैं. देश के 13 अखाड़े और 127 संप्रदायों के आधार पर मठ और मंदिरों के डेटाबेस तैयार किए हैं.

देश में 1 लाख उपेक्षित मंदिर, सबसे ज्यादा दक्षिणी राज्यों में

कर्नाटक 2,56,000, तमिलनाडु 90,000, मध्यप्रदेश 76,000, बिहार 4,309 और राजस्थान में 30,000 मंदिर हैं. देश में एक लाख मंदिर उपेक्षित हैं जिनमें सर्वाधिक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में हैं. वर्ष 2002 में कर्नाटक के पास 2,56,000 मंदिर से लगभग 72 करोड़ रुपए का चढ़ावा आता था. लेकिन भोग-आरती के नाम पर सिर्फ 10 करोड़ रुपए ही मंदिर में सालाना खर्च का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता था. ऐसे में 62 करोड़ रुपए हज सब्सिडी, मदरसा, चर्च, मिशनरी समेत तमाम स्थानों पर खर्च होते थे. मध्य प्रदेश मे क्षेत्र 76,000 मंदिर हैं. यहां 600 मंदिर ऐसे हैं, जहां महंत गद्दी संभालते हैं. इन्हें दो से तीन हजार रुपए वेतन दिया जाता है. अब काशी से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *